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इंसानी...

इंसानी हादसों के, कुछ ऐसे निशान हैं, उड़ा वह इतना पर फिर भी, बौनी उड़ान है, तकदीर बदलने को तेरे, यहां रास्ते तमाम है, घर है हौंसला तेरा मज़बूत, तो मुकम्मल मुकाम है।

By Mr. Akabar Pinjari
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