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तेरे तससवुर...

तेरे तससवुर से ही इतने बेताब हैं सोच तेरे रूबरू होने का आलम क्या होगा खुदा भी क्या चीज़ है ख़ुद अज़ीज़ रहने के लिए तुझे क़रीब होने नहीं

By khushbu singh Tomar
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