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संदेह के...

“ संदेह के गहरे अंधकार में कहीं उजीता ढूंढ रहा मोह-माया के ग्रन्थालय में देखो गीता ढूंढ रहा निज अंतर्मन जब मैला है तुम पर दोष मढूं कैसे मैं राम नहीं बन पाया फिर क्यों तुममें सीता ढूंढ रहा ”

By Vaibhav Dubey
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