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चलो माना ...

चलो माना कि हाथों से भी सागर छूट जाते हैं जिन्हें पीने कि ख्वाहिश है वो आकर लूट जाते हैं कभी देखा है क्या गिरता हुआ झरना पहाड़ों से लगे जब चोट पानी की तो पत्थर टूट जाते हैं

By Vaibhav Dubey
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