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परिवार है...

परिवार है साथ तो आज़ाद बेपरवाह सी हूँ मैं अपनों का है साथ तो मज़बूत चट्टान सी हूँ मैं ज़िन्दगी है आसाँ जो सुख दुख के साथी हाँ संग चारों ओर ख़ुशियों और उमंगों के बिखरे हैं रंग

By Anshu Shri Saxena
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