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परिंदा हूँ...

परिंदा हूँ ,परवाज़ नही है, जीवन है ,पर साज़ नही है।। सारे दुख कैसे , कह पाउँ कहने को ,अल्फ़ाज़ नही है।।

By Rajnishree Bedi
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