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मेरे सपनों...

मेरे सपनों को कुचला था जब सबने तब पंख भी कुचल दिये थे पर हिम्मत तो तब भी थी अब भी है उड़ने की भले वो सबको बौनी उड़ान ही क्यों न लगे !! रूबी प्रसाद

By Ruby Prasad
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