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मेरे शेर ...

मेरे शेर महज़ शेर हैं, कोई आपबीती थोड़ी है.... तेरा हुस्न महज़ एक धोखा है, कोई परिनीति थोड़ी है... तू झूठा दावा भी कर, तुझे सर आँखों पे भी रखूं... ये इश्क़ है जनाब कोई राजनीति थोड़ी है...

By Vishal Sinha
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