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एक रोज नहीं...

एक रोज नहीं तो दो पल ही सही, तू मिल तो कभी मैखाने में... कुछ मेरे सही कुछ तेरे सही, हर राज़ घोलेंगे पैमाने में.... जो गुलाब तुमने दिया था मुझे, वो आज भी है तहखाने में... तू मिल तो सही बतलाएं तुम्हें, तू खुदा भी था किसी ज़माने में....

By Vishal Sinha
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