STORYMIRROR

कविता ...

कविता -:कोई आया-: वर्षों इंतजार के बाद आहिस्ता से अनायास जिंदगी में कोई ऐसे आया जैसे जाड़े में सुबह की धूप नें हौले से मेरी खिड़की को खड़खड़ाया और कहा हो की अब उठो आंखें खोलो बाहर देखो सुबह हो गई। जैसे पहली बार अभी अभी मेरे सामने गुलाब की कली

By सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत
 163


More hindi quote from सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत
20 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
3 Likes   1 Comments

Similar hindi quote from Abstract