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कुछ बीते...

कुछ बीते हुये लम्हों की तनहाईया बिखर गयी कहकशों की दीवार से,, कुछ आने वाले लम्हों को इंतजार है महकती हुयी फुलवारी का।।

By Jyoti Durgapal
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