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कुछ बदली...

“ कुछ बदली हुई तक़दीर नज़र आती है यादों की एक ज़ंजीर नज़र आती है पड़ु भी तो केसे पड़ु जालिम किताब के हर पन्ने पर तेरी तस्वीर नज़र आती है ”

By Mohammad Runijawala
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