STORYMIRROR

कुछ बदली...

कुछ बदली हुई तक़दीर नज़र आती है यादों की एक ज़ंजीर नज़र आती है पड़ु भी तो केसे पड़ु जालिम किताब के हर पन्ने पर तेरी तस्वीर नज़र आती है

By Mohammad Runijawala
 142