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कल कल नदी...

कल कल नदी मैं बहती शान से , बहती रहती निरंतर ये धारा , पत्थर की परवाह किये बिना , जैसे नाचती मिलने चली सागर से। नदी की आत्मकथा है निराली , सबके दिलो को है ये लुभाती। शिखा

By Shikha Sanghvi
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