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जिसमें कोई...

जिसमें कोई निशां नहीं मेरा, वो दुनिया पुरानी है। जिसमें होगी मेरी ज़मीं, थोड़ा सा मेरा आसमां, ऐसी एक नई दुनिया बनानी है।

By Kanchan Shukla
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