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जिस कलम से...

जिस कलम से शूरु की मैने लिखनी अपनी पेहली बात, आज उसी कलम की निलामी देख, इस शायर की ना रही कोई औकात इस शायर की ना रही कोई औकात |

By Surendra Solanki
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