DEAR ZINDGI TU MUJHE ACCHA SHAYAR NAHI, SIRF ACCHA INSAAN BANA DE ITNA HE KAAFI HAI MERE LIYE.
जिस कलम से शूरु की मैने लिखनी अपनी पेहली बात, आज उसी कलम की निलामी देख, इस शायर की ना रही कोई औकात इस शायर की ना रही कोई औकात |