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जिम्मेदारियो...

जिम्मेदारियों के बोझ को उठाए घर से दूर रहते हैं, घर गांव की याद में कई रात सोते नहीं। दर्द दे दो जितना भी देना हो, लेकिन हम मुस्कुराएंगे, साहब हम लड़के हैं और लड़के रोते नहीं। अभिजित त्रिपाठी "अभि"

By Abhijit Tripathi
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