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इतनी...

इतनी शिक़ायत न कर ज़िन्दगी से_ रूठ जाओ अगर तुम,मनाती नहीं है। इक खेल शतरंज के जैसा जीवन_ बाज़ी पलट के, फिर आती नहीं है ।। ~ज्योति किरण

By ज्योति किरण
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