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इन आंधियों...

“ इन आंधियों में वह दम नहीं कि मेरे अंदर की आग को बुझा पाएं, मैंने स्वयं को तराशा है तूफ़ानों में, फ़िर कैसे बह जाऊंगी , हालात के इन उफ़ानों में ...! परमजीत कौर ”

By paramjit kaur
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