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एक भ्रम को...

एक भ्रम को सच बना कर जीना चाहती थी भूल गई थी स्याह पन्नो पर लिखी इबारत को केवल पढ़ा जा सकता है बदला नहीं जा सकता ।

By Kritika gupta
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