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देखा है...

देखा है अक्सर रिश्तों में सोच का फर्क पैसों का फर्क समय का फर्क पसंद का फर्क और यही फर्क रिश्तों की पोटली की एक एक गाठ को खोलता चला जाता है।

By Vajid Khan
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