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छोड़कर...

छोड़कर बाबुल का घर पिया तेरे घर आई हूँ । तेरी जीवन की डोर से बंधकर मैं तेरी कहलाई हूँ । फिर भी क्यों मैं पराई हूँ

By Jaypoorna Vishwakarma
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