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अच्छाई की...

अच्छाई की कोई सीमा नहीं । बुराई का कोई अंत नहीं। फिर भी सपने पूरे होते हैं । क्योंकि सच्चाई के दामन में बढ़ते और सँवरते हैं।

By Shailaja Bhattad
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