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समाज में...

समाज में कहीं आयताकार तो कहीं वर्गाकार तो कहीं विषमबाहु त्रिकोण वाली स्थिति दिखती है। स्थिति कोई भी हो लेकिन सोच का अंत वृत्ताकार हो तो सामंजस्य बना रहता है।

By Shailaja Bhattad
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