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212 1222 212 1222 प्यार का अगर तुमने व्याकरण लिखा होता। तिश्नगी मिटी होती, नेह भी रखा होता। प्रीत की धुनी बजती, श्याम की कृपा आती ज़िंदगी दमक उठती, श्याम भी दिखा होता। - डॉ प्रतिभा गर्ग

By Pratibha Garg
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