कोख में नव माह रखकर, कष्ट नानाविध सहे। पीर पर्वत सी सही पर, अश्रु दृग से कब बहे।। मातृ वंदन इस धरा... कोख में नव माह रखकर, कष्ट नानाविध सहे। पीर पर्वत सी सही पर, अश्रु दृग से कब बहे...