STORYMIRROR

Mani Mishra

Others

3  

Mani Mishra

Others

तर्पण

तर्पण

1 min
26

बांध कर दूसरे सिरे पर एक भारी सा पत्थर 

फेक दूँगी कुछ सपनो को 

गंगा की तेज धार में ..........


जब होगा उन सपनो का पिंडदान 

तब मोक्ष मिलेगा मेरे जीवन को ..


ये मृ-तयूदंड सज़ा है तुमहारी 

समय पर पूरी ना होने की..


अब तुम अपराधी हो 

मेरे अन्तरमन को 

उक्साने के ..


तुम भी मर कर पूरे हो जाओगे .. 

और ....

मैं भी तरपन कर दूँगी 

जीवन की एक और 

अपूरणता का .........


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन