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Jitendra sharma

Others

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Jitendra sharma

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तिजारत

तिजारत

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दिल पर लोटते हैं साँप,

जब रिश्ते तिजारत बन जाते हैं


थे जो कभी ख़ास शागिर्द,

देखते ही देखते रक़ीब बन जाते हैं


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