सबब
सबब
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मौन आंखें बोल जाती हैं
मौन आंखें टाल जाती हैं
परेशानियां तो बहुत हैं जीवन में
कुछ समय पर डाल दो
हौले हौले डोर खुल जाती है
व्यथा" हरपाल" घुल जाती है।
