STORYMIRROR

Radhey Shyam

Others

2  

Radhey Shyam

Others

सावन तू अब आया

सावन तू अब आया

1 min
34

कितना सताया कितना रुलाया और सावन तू अब आया

सूख गई धरती सूख गए पत्ते सूख गई नदिया और झरने

बेचैन मन था आकाश तपन था

हवाओ में मानो अग्नि का कण था

फिर भी तू तब ना आया

कितना सताया कितना रुलाया और सावन तू अब आया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन