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Ragini Mathur

Others

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Ragini Mathur

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रिमझिम बरसा पानी

रिमझिम बरसा पानी

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बादलों से बरसता रिमझिम पानी,

गरजे बादल ख़ूब तूफ़ानी,

हवा चले जो धीमी धीमी,

मिट्टी की ख़ुशबू भीनी भीनी,

झूम उठे मन नाचे गाए,

बच्चों के जैसे उधम मचाए,


पेड़ो पर चिड़िया चहकती

फूलों की खुशबू है महकती,

ऐसे में मिल जाए पकौड़े और

अदरक वाली चाय

परीवार वालों का तो बस

दिन बन जाए,

रिश्तों में धुली और मिठास,

कुछ अपने बन गए और खास


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