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Vinod Kumar Mishra

Others

5.0  

Vinod Kumar Mishra

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पत्थर

पत्थर

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शीशा है दिल मेरा,

लोग तोड़ देते हैं,

सोचता हूँ पत्थर बना लूँ,

शायद पूजने लग जाएँ।



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