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Kavita Pareek

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प्रकृति

प्रकृति

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मन करे 

प्रकृति का हिस्सा हो जाऊं

बन पक्षी

डाल डाल झूलुं

कभी बन झरना

झर झर झर जाऊं

बन हवा का झोंका

हरी हरी पत्तियों 

का स्पर्श पाऊं

मन करे कवि 

प्रकृति का हिस्सा हो जाऊं।


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