फाग
फाग
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अबके बरस ना खेलो फाग ,कि बरी बरजोरी तुमरी है
मगन होते हो कान्हा रंग संग ,बस पीछे टोली तुमरी है,
जाओ तुम रसिया नटखट बड़े, चपल हैं तुमरे काज
भीगी राधे,भीगी सखियां ,छिप गई देखो मारे लाज,
जो चाहो खेलन होरी तो आओ फिर बृज धाम
मन संग गाएं गीत सभी, छेड़े राग मल्हार श्याम,
घुल जाए पवन मैं यूं अबीर ,हो जाएं सतरंगी ये गगन
यूं बिखराओ जादू अपना, हर बृजवासी हो जाए मगन।
