नारी की शक्ति
नारी की शक्ति
नारी है माँ, नारी है बेटी,
नारी निभाती है कई किरदार ।
मर्यादाओं के बंधन में रहकर,
नारी हर तकलीफ को सहती है जाती।
कभी पिता कभी पति कभी बच्चों की खुशियों की खातिर,
नारी अपनी ख्वाहिशों को मन में है दबाती,
नारी जब चार दीवारी में कैद कर दी जाती,
नारी अपनी शक्तियों से वंचित हो ही जाती,
नारी का स्वभाव होता है निर्मम
नारी होती है भावनाओं से लबरेज,
नारी होती है घर की इज्जत,
नारी से ही तो होती है घर में रौनक ।
नारी को मिले गर मौका कोई,
तो नारी खुद को हर पड़ाव में साबित कर दिखाती,
आए घर परिवार में कोई विपदा,
तो नारी ही तो हैं जो सभी को हिम्मत न हारने का पाठ पढ़ाती,
नारी की शक्ति होती हैं अनेक,
कभी नारी हिंसा हैं सहती तो,
कभी झांसी की रानी बनकर खुद पर हो रहे
अत्याचारों के खिलाफ़ आवाज हैं उठाती,
मौका पड़े तो अपने लिए हो या
अपनो की सुरक्षा की खातिर अनेक शस्त्र है उठाती।
खुद से पहले जो अपनों के बारे में सोचे,
खुद भूखे रहकर अपनो की थाली में अनाज जो परोसे,
नारी हैं बहन, नारी हैं बहु, नारी हैं देवी जिसका आदर करना हैं जरूरी,
नारी हैं संस्कार, नारी हैं सुविचार, नारी हैं देश के विकास आधार,
नारी की शक्तियों को पहचानो, नारी हैं बेस्कीमती रत्न इस बात को मानों।
