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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

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मत करो खिलवाड़ -( 25 )

मत करो खिलवाड़ -( 25 )

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प्रकृति हर समय हमें 

यूँ ही सजग करती रहती है,

जब भी करते रहेंगे गलत हम 

ये हमें बताती रहती है !! 

हँसाती भी ये प्रकृति और 

रुलाती भी प्रकृति है! 


अब भी वक्त है ऐ मानव 

सुधार कर ले ये बताती है !! 

विज्ञान ने विनाश की तरफ 

मोड़ दिया ये बताती है ! 

मत कर खिलवाड़ प्रकृति से 

ये संकेत बताती है !!   

             


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