STORYMIRROR

देव शर्मा

Others

3  

देव शर्मा

Others

मर्द को दर्द

मर्द को दर्द

1 min
240

आखिर कौन कहता है

मर्द को दर्द नहीं होता है

होता हैं बहुत होता है

नख से शिखा तक 

रोम रोम में और

बदन के हर पोर में 

अपना दर्द जता पाना 

हम सीख नहीं पाते


रोते हम भी है बस 

चीख नहीं पाते 

किराने की उधारी

खुद की खुद्दारी

आर्थिक लाचारी 

घर में बीमारी 

ऐसी कई जिम्मेदारी

हमें मौका नहीं देती 

हमदर्दी पाने का

हमारी महानता के

बड़े किस्से नहीं होते


हमारे दुख दर्द के 

हिस्से नहीं होते है 

हम बस दौड़ रहे है

जिम्मेदारी की रस्सी में जकड़े

अपनी भावना वेदना हाथ में पकड़े

गर्म और बर्फीला मौसम

हमारे लिए भी गर्म सर्द होता है

सच मानिए

मर्द को भी दर्द होता है



Rate this content
Log in

More hindi poem from देव शर्मा