STORYMIRROR

ABHISHEK KUMAR

Others

4  

ABHISHEK KUMAR

Others

मनमोहन

मनमोहन

1 min
396

अपनी इस राधा को 

ना जाओ कान्हा छोड़ के

हे निर्मोही मनमोहन

मुख ना जाना यूँ मोड़ के


तेरे इक मुरली की धुन पर

दौड़ी दौड़ी आई थी

मूरख थी जो प्रेम में तेरे

सारा जग बिसरायी थी

सारे ये गोप ग्वाले तुझको पुकारे

तेरे ही आगे अपना सब कुछ है हारे

आओ कन्हैया हम है तेरे सहारे

व्याकुल ये नैन तेरा राह निहारे


जनम जनम के सारे बंधन

ना जाना अब तोड़ के


अपनी इस राधा को 

ना जाओ कान्हा छोड़ के

हे निर्मोही मनमोहन

मुख ना जाना यूँ मोड़ के


सूनी ये गोकुल की गलियाँ

तेरा राह निहारती

बेकल ये यमुना की लहरे

बस तुझको ही पुकारती

कण-कण में रूप तेरा 

देता है दिखाई

जाने ये कैसी विपदा

हम सब पर आई

आ जाओ कान्हा फिर से रास रचाने

प्रेम से हम सब को फिर गले से लगाने


माखन चोर तू खा जा माखन 

मटकी को फिर फोड़ के


अपनी इस राधा को 

ना जाओ कान्हा छोड़ के

हे निर्मोही मनमोहन

मुख ना जाना यूँ मोड़ के


तेरे बिन मेरे जीवन का

हर श्रृंगार अधूरा है

राधा बिन सांवरिया तेरा 

जीवन भी कहा पूरा है

प्रीत जगाकर कान्हा

कैसे तू जायेगा

गोकुल की याद को तू

कैसे मिटायेगा

मुरली कि तान पर तू

किसको नचायेगा

राधा के प्रीत को तू

कैसे भुलायेगा


हे निष्ठुर निर्मोही अब तो

आजा जल्दी दौड़ के


अपनी इस राधा को 

ना जाओ कान्हा छोड़ के

हे निर्मोही मनमोहन

मुख ना जाना यूँ मोड़ के



Rate this content
Log in