मलाल ए मुहब्बत
मलाल ए मुहब्बत
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एक अजीब उदासी से गुजर रहा हूं मैं
उसके वादों पे जीकर मर रहा हूं मैं
नहीं पता मुझे आपस का ताल्लुक़ मगर
आपके खातिर कुछ तो बनकर रहा हूं मैं
उसको समझदार समझकर लगता हैं
न ज़ाने क्यूं कोई तो भूल कर रहा हूं मैं
मुझे अपनी बाहों से दूर कर दो अब
इतनी करीबी देखकर डर रहा हूं मैं
अभी मत करना इन हवाओं से दोस्ती
बनके ओढ़नी तेरे माथे पे ठहर रहा हूं मैं।
