STORYMIRROR

SAURABH PATEL

Others

4  

SAURABH PATEL

Others

लगा हूं

लगा हूं

1 min
226


जब से तेरी आंखों को पढ़ने लगा हूं 

मैं ख़ुद को अनपढ़ समझने लगा हूं


तुम मुझे अब इतनी भी बुरी नहीं लगती

जब से मैं इश्क़ को इश्क़ समझने लगा हूं


शामे जिस कदर गुज़रती है तेरी यादों में

लगता है कि मैं वक्त की तेज़ी को हराने लगा हूं


वो मुझे एक नाकाम लड़का समझती है

जब से मैं इश्क़ में किए गए वादों पे काम करने लगा हूं


महफ़िल में तेरा ज़िक्र कुछ यूं पसंद है मुझे

कि अपने शेर पर खुद ही मुकर्रर कहने लगा हूं


ज़माने ने मुझे बाहर कर दिया अपने दायरे से

जब से मैं अपनी सोच को तवज्जो देने लगा हूं


मेरा घर मुझे पूछता है तुम"सौरभ"ही हो

जब से मैं उसकी तस्वीर में रहने लगा हूं।


              


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन