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KatyayaniDrPurnima Sharma

Others

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KatyayaniDrPurnima Sharma

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मित्र कैसे हो

मित्र कैसे हो

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मित्र ऐसे हों कि जब मिलें तो लोग कहें

काश हमारे पास भी ऐसे ही मित्र होते...

क्योंकि मित्रता ही एक ऐसा सम्बन्ध है

जहाँ दोनों ही सुनते हैं एक दूसरे की

बिना किसी बदले की उम्मीद से...

जहाँ पहचानते हैं एक दूसरे के 

सुख और दुःख को

और देते हैं साथ हर परिस्थिति में

दूर भगाने का उदासी को एक दूसरे की

प्रयास हैं करते...

मित्र के मुख पर देख मीठी सी मुस्कान

भर जाता रंग खुशियों का जीवन में उनके भी...

कभी नदी किनारे रेत पर बैठ

उछाल देते हैं कोई कंकड़ नदी के बहाव में

और देखकर मचलना पानी का

लगाते हैं ठहाके बड़ी ज़ोर से...

कभी चढ़ते हुए किसी पर्वत पर

जब फिसलता है पाँव एक का

तो दूसरा पकड़ हाथ खींच लेता है ऊपर

और फिर हँस पड़ते हैं दिल खोलकर...

रेगिस्तानों की मृग मरीचिका में 

वर्षा की शीतल फुहार से होते हैं हैं ये दोस्त...

यही साथ बन जाता है मार्ग बढ़ने का आगे

और तब पहुँच कर मंज़िल पर अपनी

एक दूसरे के हाथ पर देकर ताली

नाच उठते हैं झूमकर मस्ती में...


सभी मित्रों को सादर सस्नेह समर्पित



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