मेरे पापा
मेरे पापा
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उँगली पकड के चलना सिखाया
जब गिरी तो उठना और फिर से चलना सिखाया
जब मैं रूठी तो कभी प्यार तो कभी गुस्से से मनाया
मुश्किलों से लड़ना सिखाया
सच की राह पर चलना और गलत से लड़ना सिखाया
धमँ की राह पर चलना और सेवा परमो धमँ बताया
हंमेशा सच बोलना सिखाया
बड़ों की सेवा करना और छोटो से प्यार करना सिखाया
ईषा, निंदा, अहंकार को पाप बताया और स्वाभिमान से जीना सिखाया
शान से जिंदगी जिने का तरीका सिखाया
मेरे पापा ने मुझे जीवन का सार सिखाया।
