क्या इसी लायक हैं हम बेटियाँ
क्या इसी लायक हैं हम बेटियाँ
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क्या इसी लायक हैं हम बेटियाँ
किसी के हवस का शिकार तो
अपमान सहने के लिए हैं बेटियाँ
मर्द की मर्दानगी का शिकार
बनने के लिए हैं बेटियाँ
दर्द सह के चुप रहने लिए हैं बेटियाँ
अपने मन के कपड़े पहने तो बाजारू
और दूसरों के मन का पहने तो
बहन जी बोलने के लिए हैं बेटियाँ
सच बोल तो बेशर्म
और चुप रहे तो घमंड
का सोच बनने के लिए हैं बेटियाँ
ससुराल में गालियाँ
और घर में बोझ के लायक हैं बेटियाँ
तो सुन लो भईया
तुम्हारी सोच है घटिया
ना होती अगर जन्म लड़कियों की
कहाँ से लाते वंश को चलाने
के लिए कठपुतली
किसको बोलते माँ, बहन और भाभी
बेटियों की इज़्ज़त करना सीख
वरना खुद की इज़्ज़त के लिए
मांगना भीख
