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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

Others

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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

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क्षणिकाएं ( 60 )

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जला नहीं प्रहलाद,

होलिका बनी 

राख की ढेरी, 

झूठ - सत्य का 

अंतर होते 

लगी नहीं कुछ देरी,  

दुहराता.....,

ईतिहास सदा ही 

अपनी बातें पुरानी 

सदैव....,

सत्य की विजय हुई है

गया झूठ का पानी,

मद-मस्ती में 

गलती ना होगी,  

सीख ये हम 

होली-पर्व पर सब लेलें, 

पर्व आज होली का 

हम सब नऐ रंग में खेल !!


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