क्षणिकाएं ( 60 )
क्षणिकाएं ( 60 )
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जला नहीं प्रहलाद,
होलिका बनी
राख की ढेरी,
झूठ - सत्य का
अंतर होते
लगी नहीं कुछ देरी,
दुहराता.....,
ईतिहास सदा ही
अपनी बातें पुरानी
सदैव....,
सत्य की विजय हुई है
गया झूठ का पानी,
मद-मस्ती में
गलती ना होगी,
सीख ये हम
होली-पर्व पर सब लेलें,
पर्व आज होली का
हम सब नऐ रंग में खेल !!
