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Divya H

Others Romance

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Divya H

Others Romance

खामोशियाँ

खामोशियाँ

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ख़्वाहिशें बहुत थी,

लेकिन तक़दीर में तो कुछ अलग ही लिखा था!

कौन टाल सकता है होनी को?

जो होनी है वह तो होगी ही।

अल्लाह के पैरों में गिर के वह उस दिन रोया था

दुआ तो सब माँगते है,

लेकिन उस दिन उसने दवा माँगी थी,

प्यार से दूर भागने के लिए,

कुछ पल अपने आप से रुबरु करने के लिए,

उसने अपने आप को किसी और से प्यार करके खो दिया।

अपनी परछाइयों में खुद को ढूंढने लगा,

एक बात तो सब भूल ही गए

कि आखिर परछाइ ही तो उसका पीछा कर रही थी,

और उसको चीख चीख कर पुकार रही थी।

आज लगता है जैसे उसने अपनी परछाइयों की

ख़ामोशियों से मुलाकात कर ली है,

जैसे एक शायर को अपने शब्द लौटा दी गई हो,

जैसे एक जिस्म को अपनी जान मिल गई हो।

दुआ तो मैंने भी माँगी थी तुम्हारे लिए,

लेकिन तुम किसके लिए माँगते हो?


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