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Sapna Rani

Others

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Sapna Rani

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हक़ीक़त

हक़ीक़त

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फ़लसफ़ों से जिन्दगी की गुज़र नहीं होती,

नज़र बस आसमां पे हो तो ज़मीं मयस्सर नहीं होती।


दरख्तों पर भी घोंसले बना लेते हैं परिन्दे,

ज़िन्दग़ी सिर्फ़ जमीन-ओ-आसमां पे ही बसर नहीं होती।


नज़र रहती है फ़क़त चाॅंद सितारों पर जिनकी,

कब पैरों तले खिसक जाती है ज़मीं ख़बर नहीं होती।


जो रातें देखती हैं ख़्वाब आसमां को फतह करने का,

उन रातों की देर तलक सहर नहीं होती।


कुसूर कुछ तो तुम्हारा भी रहा होगा,

हर ख़ता दूसरों के सर नहीं होती।



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