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ग़मों की चोट

ग़मों की चोट

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ग़मों की चोट भी खाओ मगर हसँना जरूरी है
हँसो तुम खूब ही खुलके अगर हसँना जरूरी है ।।


ये माना तूने हर इक शख्स को कितना सताया है
मगर ये जान लेना ए! फिकर हसँना जरूरी है ।।


अगर चलना है मेरे साथ तो इतना समझ लेना
यहाँ गुमसुम से मेरे हमसफर हसँना जरूरी है ।।


नही चलता है यहाँ काम पल भर मुस्कुराने से
तेरा ए! जिन्दगी अब उम्र भर हसँना जरूरी है ।।


तभी तो आयेगी इस जिन्दगी में खुशनुमा सुबह
बशर तेरा तो सारी रात भर हसँना जरूरी है ।।


कलि मुस्कायेगी पत्ते खुशी से झूम जाएगें
हर एक मौसम में शजर हसँना जरूरी है ।।


रिश्ता तुम्हारा पुख्तगी में मुब्तिला होगा
इधर हसँना जरूरी है उधर हसँना जरूरी है ।।


कहीं मायूस ना हो जाए तुझपे चलने वाले
राही की खातिर ए! डगर हसँना जरूरी है ।।


नही हूँ ना समझ मै भी समझदारी समझता हूँ
'लकी' मालूम है मेरा किधर हसँना जरूरी है ।।


साहित्याला गुण द्या
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