दोस्तों की महफिल
दोस्तों की महफिल
1 min
654
ये हकीकत है
की सच्चे दोस्त बहुत कम है
परंतु दोस्तों से ही बनती
महफ़िल लाजवाब है
पुरानी ही सही
परंतु अब भी नौजवान है,
क्योंकि नाराजगी की जगह हम
याराना फरमाया करते थे
दुश्मनी को करके बाजू
दोस्ती को गले लगाया करते थे।
जो हो जीने की वजह
वे हर पल याद आते हैं
अब तो एक दूजे को बस
वही याद दिलाया करते हैं,
जो कभी हम सब
मिलकर किया करते थे।
