Covid19
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कुछ वक्त स्थगित करते है
अपने विवेक को थामे
ये स्पर्श, घूमने फिरने, टहलने से
कुछ समय मुल्तवी करते है
ये समाज, इंसान के मरने से
कुछ दिन रहने देते है
हृदय के परवाह को
जब मन की उत्कंठा
होती है उद्वेलित
कुछ सत्कर्म करते है
मानवता को जिजीविषा बना कर
अपने गृह में ही ठहरते है
अनावश्यक निकलना त्याग कर
प्रेम-प्रणय ये ह्रदय धुन से
अन्तः मन के भाव में
पथ प्रदर्शित करते है
पहल यहीं है सजग हो जाओ
हिफाज़त सभी की रखते है।
